आज की बात

बातें इधर उधर की --कुछ अपनी कुछ आपकी

Tuesday, July 25, 2006

अंतरात्मा

रोज की ही तरह मैं आज सुबह उठा और अपने दैनिक कार्यों में लगा हुआ था, की अचानक से हुई आवाज़ ने मेरा ध्यान वहां पर केन्द्रित किया --- वो आवाज़ थी मेरी अंतरात्मा की –जो कि चीख़ चीख़ कर रो रही थी और मुझसे कुछ कहने की कोशिश कर रही

2 Comments:

Blogger priyank said...

yeh toh batao ki antaratma ne kya kahan

6:19 AM  
Blogger RAVI KUMAR said...

पुरानी यदों के साहारे ज़िंदा हैं वरना कब के.....

10:01 PM  

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