tag:blogger.com,1999:blog-31661485.post115387880722270169..comments2007-08-31T02:03:21.507-07:00Comments on आज की बात: याद ना जाये बीते दिनों कीप्रभंजन नागरhttp://www.blogger.com/profile/06510390489745801997noreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-31661485.post-73363618221491058732007-08-31T02:03:00.000-07:002007-08-31T02:03:00.000-07:002007-08-31T02:03:00.000-07:00आ गया पटाखा हिन्दी काअब देख धमाका हिन्दी कादुनिया ...आ गया पटाखा हिन्दी का<BR/>अब देख धमाका हिन्दी का<BR/>दुनिया में कहीं भी रहनेवाला<BR/>खुद को भारतीय कहने वाला<BR/>ये हिन्दी है अपनी भाषा<BR/>जान है अपनी ना कोई तमाशा<BR/>जाओ जहाँ भी साथ ले जाओ<BR/>है यही गुजारिश है यही आशा ।<BR/><A HREF="http://nishikantworld.blogspot.com" REL="nofollow">NishikantWorld</A>Nishikant Tiwarihttp://www.blogger.com/profile/01492698893838649166noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-31661485.post-1154174743849663182006-07-29T05:05:00.000-07:002006-07-29T05:05:00.000-07:002006-07-29T05:05:00.000-07:00स्वागत है आपका!मुझे तो २५ पैसे कि दस ही मिलती थी :...स्वागत है आपका!<BR/>मुझे तो २५ पैसे कि दस ही मिलती थी :(RC Mishrahttp://www.blogger.com/profile/09541282321814427194noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-31661485.post-1153931029291082492006-07-26T09:23:00.000-07:002006-07-26T09:23:00.000-07:002006-07-26T09:23:00.000-07:00हिन्दी चिट्ठाकारों के परिवार मे आपका हार्दिक स्वाग...हिन्दी चिट्ठाकारों के परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है।अनूप शुक्लाhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-31661485.post-1153925785790051962006-07-26T07:56:00.000-07:002006-07-26T07:56:00.000-07:002006-07-26T07:56:00.000-07:00प्रभंजन भाईस्वागत है आपका हिन्दी चिट्ठा जगत में, आ...प्रभंजन भाई<BR/>स्वागत है आपका हिन्दी चिट्ठा जगत में, आपने बचपन की बातें याद दिला दी और संयोग से आज बारिश भी हो रही है सो आज अब घर जा कर " वो कागज की क़श्ती" चला कर पुराने दिनों को याद करेंगे।Sagar Chand Naharhttp://www.blogger.com/profile/13049124481931256980noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-31661485.post-1153889346449054032006-07-25T21:49:00.000-07:002006-07-25T21:49:00.000-07:002006-07-25T21:49:00.000-07:00प्रभंजन भाई, पुराने दिनो की तो बात ही निराली है।बच...प्रभंजन भाई, पुराने दिनो की तो बात ही निराली है।बचपन की यादे, वो शरारतें, वो स्कूल के दिनों की बाते जब भी याद करों जिन्दगी मे अलग ही रंग भर जाते है। <BR/><BR/>हिन्दी चिट्ठाकारों के परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है। उम्मीद है आपका इस परिवार के सक्रिय सदस्यों मे शुमार होगा।Jitendra Chaudharyhttp://www.blogger.com/profile/09573786385391773022noreply@blogger.com